क्रिकेट विश्व में बहुत सी ऐतिहासिक पारियां खेली गईं | कुछ पारियां ऐसी थी, जिनका स्तर बहुत ऊंचा था | ऐसीही कुछ पारियों के बारे में...
दिलीप वेंगसरकर १४६* (१९७९)...
पाकिस्तान तब भारत के दौरे पर पांच टेस्ट मॅचों की शृंखला खेलने आया था | फिरोज शाह कोटला के मैदान पर दूसरा टेस्ट चल रहा था | पहली पारी में पाकिस्तान के २७३ रन के जवाब में पूरी भारतीय टीम १२६ रन पर सिमट गई | दूसरी पारी में भारत दस विकेट लेने में तो कामयाब हो गया, पर तब तक जीत के लिए चौथी पारी में भारत को ३९० रन का लक्ष मुकारर हो चुका था | सधी हुई शुरुवात के बाद, भारत के लगातार अंतराल में तीन खिलाडी बाद हो गये | लेकिन एक बल्लेबाज एक छोर थामें तब भी खडा था | वह थे दिलीप बलवंत वेंगसरकर...
एक तरफ से भारत के विकेट गिर रहे थे और दूसरी तरफ दिलीप सर बल्ले को मजबूती से पकडे हुए थे | छोटी छोटी सजेदारियां बनाते हुए दिलीप सर भारत को जीत की ओर ले गये | लेकिन एक वक्त ऐसा आया, कि दिलीप सर के पास बल्लेबाज नहीं बचे थे | विकेट गिरते ही निचले क्रम के बल्लेबाजों पर दबाव बढ जाता | यहीं सोचकर दिलीप सर ने वहाँ खडे रहने का फैसला किया | वह मॅच तो ड्रॉ हो गया, पर दिलीप वेंगसरकर की नाबाद १४६ रनों की वह पारी, आज भी पाकिस्तान के गेंदबाजों को बखूबी याद है...
कपिल देव १७५* (१९८३)...
ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट इंडीज से मिली हार के बाद, झिम्बाब्वे के खिलाफ होनेवाला यह मॅच, भारत के लिए करो या मरो वाला था | भारत अगर यह मुकाबला हार जाता, तो शायद विश्व कप से बाहर हो जाता | टॉस जीतकर बल्लेबाजी तो मिली, लेकिन झिम्बाब्वे के तेज गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों के परखच्चे उडा दिये | थोडे ही समय में १७ रन पर ५ विकेट, ऐसी नाजुक स्थिती में भारत पहूँच गया | 'अब इस मुकाबले में कोई तुक नहीं...' ऐसेही सब को लग रहा था | लेकिन एक इंसान का जजबा और हौसला अभी भी बुलंद था | वह था, भारत का कपतान कपिल देव निकंज...
सधी हुई सुरुवात करते हुए कपिल पाजीने पहले अर्धशतक पूरा किया | फिर शतक पूरा किया | धीरे-धीरे भारत का स्कोर बढता गया | भोजनकाल के बाद तो जैसे कपिल पाजी ने रौद्र रूप धारण किया | सारे गेंदबाजों की जमकर पिटाई करते हुए कपिल पाजीने विश्व रिकार्ड तोड, नाबाद १७५ बनाये और भारत को एक सम्मानजनक स्कोर पर खडा किया | उस मुकाबले को जीत भारत आगे बढा और अंत में १९८३ का विश्व विजेता बना | आज भी कपिल देव की नाबाद १७५ रनों की वह पारी, भारतीय एक दिवसीय क्रिकेट इतिहास की सर्वश्रेष्ठ पारी मानी जाती है...
सचिन तेंडुलकर १४३ (१९९८)...
भारत, ऑस्ट्रेलिया और न्यूझीलेंड के बीच शारजा में कोका-कोला कप खेला गया था | अंतिम मुकाबले तक आते आते ऑस्ट्रेलिया अविजित था, तथा भारत और न्यूझीलेंड ने एक एक जीत दर्ज की थी | ऐसे में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला जानेवाला मुकाबला, भारत के लिए एक तरह से virtual semi final था | भारत मुकाबला जीत जाता तो उसका अंतिम मुकाबला तय था | भारत अगर हार भी जाता, फिर भी नेट रनरेट के चलते एक पडाव अगर भारत पार कर लेता, तो भी भारत अंतिम मुकाबले के लिए पत्र हो जाता...
रेंत के तूफान में लिपटे इस मुकबले में जब भारत बल्लेबाजी करने उतरा, तो उनकी पारी लाडखडाने लागी | वह तूफान भी उस वक्त भारत के खिलाफ जा रहा था | अंतिम मुकाबला फिसलता दिखाई दे रहा था | एक तर्फ तूफान तो दूसरी ओर गिरते विकेट | ऐसी स्थिति में भारत था | तब, एक इंसान ने उस मॅच का दारोमदार अपने कांधे पर उठाया | वह थे, सचिन रमेश तेंडुलकर | रेंत का तूफान तो थम गया, लेकिन सचिन नाम के तूफान ने मैदान पर कहर बरसाया | जब वह १४३ के नीजी स्कोर पर आऊट हुए, तब तक भारत अंतिम मुकाबले में पहुंच चुका था | रवि शास्त्री के वह शब्द आज भी कानों में गूंजते हैं, "Sachin Tendulkar has taken India into the finals single handedly..."
विराट कोहली ८२* (२०२२)...
पारंपरिक प्रतिस्पर्धी भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व कप के ग्रूप बी का यह पहला मॅच था | टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का भारत का निर्णय कारगर साबित हुआ | निर्धारित २० ओव्हरों में पाकिस्तान १५९ रन ही जोड पाया | लग रहा था, कि भारत इस लक्ष को आसानी से हासिल कर लेगा क्योंकि भारत की बल्लेबाजी काफी अंदर तक थी | दूसरी पारी शुरू होणे के कुछ ही समय में भारत के ४ पक्के बल्लेबाज आऊट हो गये | ६ ओव्हर में ४ विकेट के नुकसान पर भारत ने केवल ३१ रन बनाए थे | बहुत नाजूक स्थिति थी भारत की | तब एक बल्लेबाज ने सारी जिम्मेदारी अपने कांधों पर उठा ली | वह थे मध्यक्रम के बल्लेबाज विराट प्रेमनाथ कोहली...
एक-एक, दो-दो रन चुराते हुए कोहली ने स्कोर को आगे बढाया | उन्हें पता था, कि चौकों-छक्को के मौके मिल ही जाएंगे | अंतिम ६ ओव्हरों का खेल बचा था जब विराट ने रन बटोरने की गति बढा दी | हर ओव्हर में दो या तीन चौके-छक्के लग रहे थे | विराट का बल्ला मानो आग उगल रहा था | कोई गेंदबाज विराट कोहली के नाम की आंधी के आगे टिक नहीं पाया | अंत में विराट की शानदार नाबाद ८२ रनों की पारी की बदौलत भारत ने वह मुकाबला ४ विकेट से जीत लिया | उस दिन सारे क्रिकेट विश्व ने विराट की बल्लेबाजी का लोहा माना था...
तिलक वर्मा ७२* (२०२५)...
भारत और इंग्लंड के बीच खेली गयी टी २० शृंखला का यह दूसरा मुकाबला था | पहला मॅच जीतकर भारत ने बढत हासील की थी | इस दूसरे मुकाबले को जीतकर अपनी बढत को और पुखता करने की फिराक में भारत था | टॉस जीतकर भारत ने इंग्लंड को बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया | भारत के फिरकी गेंदबाजों के चलते इंग्लंड केवल १६५ रन ही बना पाया | भारत जब बल्लेबाजी करने उतरा, तो इंग्लंड के गेंदबाजों ने भारत के बल्लेबाजों को एक के बाद एक वापस भेजना शुरू किया | नौवे ओव्हर में ही भारत ५ विकेट खो चुका था | उस वक्त क्रिज पर मौजूद था, युवा बल्लेबाज, तिलक नामबुरी वर्मा...
तिलक ने एक छोर संभाला था | सामनेवाले छोर पर विकेट गिरे जा रहे थे | लेकिन तिलक ने हौसला नहीं छोडा | निचले क्रम में आये बल्लेबाजों को साथ लेकर तिलक ने धीरे धीरे रन बटोरना शुरू किया | ४० रन के नीजी स्कोर को पार करते ही तिलक ने रौद्र रूप धरण किया | गेयर बदलते हुए एक-दो रन के साथ तिलक ने चौके और छक्के लगाये | तिलक वर्मा के साहसपूर्ण नाबाद ७२ रनों की बदौलत, भारत ने उस तनाव भरे मुकाबले को ६ विकेट से जीत लिया...
यह सारी पारियां बहुत महत्वपूर्ण थी | भारत की जीत में इन परियों का बहुत बडा योगदान था | इन परियों के नायकों को तो हम याद करेंगे ही | लेकिन इन परियों को सवारने में नायकों के साथ सहनायकों का भी हाथ था | वह सहनायक थे, १९७९ में यशपाल शर्मा ६० रन, १९८३ में सय्यद किरमानी २४* रन, १९९८ में नयन मोंगिया ३५ रन, २०२२ में हार्दिक पांड्या ४० रन और २०२५ में वॉशिंगटन सुंदर २६ रन | इनके सहारे के बिना शायद वह पारियां इतनी आगे नहीं बढ पाती...
@ अनिकेत परशुराम आपटे.






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